कुंडलिनी जागरण योग In Hindi ⎜ Kundalini Jagaran Yoga In Hindi


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मनुष्य के शरीर में कुल 114 चक्र हैं

नाड़ी पर सात कुंडलिनी चक्र होते हैं। ये सभी चक्र शरीर के विभिन्न अंगों तथा हमाके मन एवं बुद्धि के कार्य को ऊर्जा प्रदान करते हैं।



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सात कुंडलिनी चक्र :

  1. विशुद्ध चक्र
  2. सहस्रार चक्र
  3. अनाहत चक्र
  4. मूलाधार चक्र
  5. आज्ञा चक्र
  6. स्वाधिष्ठान चक्र
  7. मणिपुर चक्र

अगर आप कुंडलिनी को जाग्रत करना चाहते हैं तो आपको अपने शरीर, मन और भावना के स्तर पर जरूरी तैयारी करनी होगी. 


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कुण्डलिनी जागरण के नियम / Kundalini Jagaran Rules : 

  • दिन की शुरुआत में तुरंत उठें, और जल्दी आराम करने का प्रयास करें।
  • खाने वाले आहार में सात्विक भोजन या पौष्टिक भोजन और प्राकृतिक उत्पाद भोजन शामिल करना चाहिए।
  • आचरण का तात्पर्य प्रत्यक्ष असम्बद्ध, वास्तविकता से बात करना और किसी से विनम्रता से मिलना है।
  • स्‍क्रब करें और खुद को शुद्ध करें।
  • नियमित रूप से समारोहों को करते हुए दिन प्रतिदिन प्राणायाम, ध्यान और चिंतन का अभ्यास करें।
  • सदाचार और निष्कलंकता आहार और आचरण से आती है।
  • अपने कार्यक्रम में दिन के हिसाब से फायदेमंद चीजें करें और भयानक विचार न करें।
  • अपने जीवन के तरीके को बदलें और इसे सही रखें।

सही स्थिति में बैठे :

  • इस लक्ष्य के साथ बैठें कि रीढ़ सीधी है।
  • फिर चाहे वह कुंडलिनी योग हो या कोई और योग, अपने बैठने की स्थिति को सही रखें।
  • इसी तरह अपने सिर को सीधा रखें।


 ध्यान केंद्रित करें : 

  • अपना ध्यान नीचे से ऊपर की ओर ले जाएं। 
  • योग और परावर्तन दोनों में अपनी सांस को नियंत्रित करना अत्यावश्यक है।
  • अपनी सांस पर ध्यान लगाओ।
  • कुंडलिनी योग करते समय, सांस पर ध्यान केंद्रित करें।
  • अपनी रीढ़ से अपने सिर तक सांस की प्रगति पर ध्यान दें।
  • अपने विचार को आधार से शीर्ष पर ले जाएँ।




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